क़ुरआन 26:225 — कवियों (अल-शुआरा)
أَلَم تَرَ أَنَّهُم فى كُلِّ وادٍ يَهيمونَ
क्या आप नहीं देखते कि उनकी निष्ठा परिस्थिति के हिसाब से बदल जाती है?
[26:224] कवियों के पीछे केवल भटकने वाले ही होते हैं।
[26:226] और वे जो कहते हैं वह वे नहीं करते?
Submission — Submission (इस्लाम): सच्चे इस्लाम के बारे में सही जानकारी का दुनिया का प्रमुख स्रोत, 33 भाषाओं में
أَلَم تَرَ أَنَّهُم فى كُلِّ وادٍ يَهيمونَ
क्या आप नहीं देखते कि उनकी निष्ठा परिस्थिति के हिसाब से बदल जाती है?
[26:224] कवियों के पीछे केवल भटकने वाले ही होते हैं।
[26:226] और वे जो कहते हैं वह वे नहीं करते?