क़ुरआन 2:267 — गाय (अल-बकराह)
يٰأَيُّهَا الَّذينَ ءامَنوا أَنفِقوا مِن طَيِّبٰتِ ما كَسَبتُم وَمِمّا أَخرَجنا لَكُم مِنَ الأَرضِ ۖ وَلا تَيَمَّمُوا الخَبيثَ مِنهُ تُنفِقونَ وَلَستُم بِـٔاخِذيهِ إِلّا أَن تُغمِضوا فيهِ ۚ وَاعلَموا أَنَّ اللَّهَ غَنِىٌّ حَميدٌ
जो ईमान लाए हो, तुम्हें अच्छी चीजों से जो तुम कमाते हो, और हमने तुम्हारे लिए ज़मीन से पैदा किया है, उसमें से चंदी देनी चाहिए। उसमें से बुराई को नहीं निकालना चाहिए, जबकि तुम खुद उसे स्वीकार नहीं करोगे जब तक तुम्हारी आंखें बंद न हों। तुम्हें यह जान लेना चाहिए कि ख़ुदा धनी और प्रशंसनीय है।
[2:266] क्या आपमें से किसी को खजूर और अंगूरों के बाग का मालिक बनना चाहिए, जिसमें बहती हुई नदियों और उदार फसलों के साथ, फिर, जैसे ही वह बूढ़ा होता है, और जब उसके बच्चे उसकी आश्रिता होते हैं, तो एक तबाही आती है और उसके बाग को जला देती है? भगवान इस प्रकार आपके लिए संकेतों को स्पष्ट करते हैं, ताकि आप विचार कर सकें।
[2:268] शैतान आपको दरिद्रता का वादा करता है और आपसे बुराई करने का आदेश देता है, जबकि भगवान आपको उससे क्षमा और कृपा का वादा करते हैं। भगवान उदार हैं, सर्वज्ञ हैं।