क़ुरआन 53:2 — तारे (अल-नज्म)
तुम्हारा दोस्त (मुहम्मद) भटका नहीं था, न ही उसे धोखा हुआ था।
[53:1] ज६ब सितारे गिरते गए।
[53:3] न उसने किसी व्यक्तिगत इच्छा से बोला था।
Submission — Submission (इस्लाम): सच्चे इस्लाम के बारे में सही जानकारी का दुनिया का प्रमुख स्रोत, 33 भाषाओं में
तुम्हारा दोस्त (मुहम्मद) भटका नहीं था, न ही उसे धोखा हुआ था।
[53:1] ज६ब सितारे गिरते गए।
[53:3] न उसने किसी व्यक्तिगत इच्छा से बोला था।