क़ुरआन 10:12 — जोना (यूनुस)
وَإِذا مَسَّ الإِنسٰنَ الضُّرُّ دَعانا لِجَنبِهِ أَو قاعِدًا أَو قائِمًا فَلَمّا كَشَفنا عَنهُ ضُرَّهُ مَرَّ كَأَن لَم يَدعُنا إِلىٰ ضُرٍّ مَسَّهُ ۚ كَذٰلِكَ زُيِّنَ لِلمُسرِفينَ ما كانوا يَعمَلونَ
जब किसी मनुष्य को कठिनाई का सामना करना पड़ता है, तो वह हमसे लेटे हुए, बैठे हुए, या खड़े होकर हमसे विनती करता है। लेकिन जैसे ही हम उसकी कठिनाई दूर कर देते हैं, वह ऐसा लगता है कि जैसे कभी उसने हमसे किसी कठिनाई को दूर करने के लिए विनती नहीं की थी! अत्याचारी के काम उनकी आंखों में इस प्रकार सजीव हो जाते हैं।
[10:11] अगर भगवान लोगों द्वारा उत्पन्न प्रायश्चित्ति को उनकी मांग के तरीके से जल्दी कर देते, तो वे पहले ही नष्ट हो जाते। हालांकि, हम उन लोगों को छोड़ देते हैं जो हमसे मिलने में विश्वास नहीं रखते, और उनकी अतिक्रमण, भूल चूक करने में रहने देते हैं।
[10:13] हमने अनेक पीढ़ियों को तुमसे पहले नष्ट किया जब उन्होंने अपराध किया। उनके पैगंबर साफ सुथरे सबूतों के साथ उनके पास गए, पर वे विश्वास नहीं किये। हम इस प्रकार दोषी लोगों को दंडित करते हैं।