क़ुरआन 18:55 — गुफा (अल-कहफ)
وَما مَنَعَ النّاسَ أَن يُؤمِنوا إِذ جاءَهُمُ الهُدىٰ وَيَستَغفِروا رَبَّهُم إِلّا أَن تَأتِيَهُم سُنَّةُ الأَوَّلينَ أَو يَأتِيَهُمُ العَذابُ قُبُلًا
लोगों को विश्वास करने से कुछ भी नहीं रोका, जब उन्हें मार्गदर्शन मिला, और उनके प्रभु से क्षमा मांगने से, केवल यही नहीं कि उन्होंने पिछली पीढ़ियों जैसे ही (चमत्कार) देखने की मांग की, या पहले ही प्रायश्चित्रूप देखने की चुनौती दी।
[18:54] हमने इस क़ुरान में हर प्रकार के उदाहरण दिए हैं, पर मानव व्यक्ति सबसे वादास्प्रद प्राणी है।
[18:56] हम केवल संदेशकों को अच्छी खबरें सुनाने और चेतावनी देने के रूप में भेजते हैं। जो लोग नास्तिक हैं, वे झूठ से वार करते हैं ताकि सत्य को हराया जा सके, और वे मेरे सबूतों और चेतावनियों को निरर्थक बना लेते हैं।