क़ुरआन 2:182 — गाय (अल-बकराह)
فَمَن خافَ مِن موصٍ جَنَفًا أَو إِثمًا فَأَصلَحَ بَينَهُم فَلا إِثمَ عَلَيهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفورٌ رَحيمٌ
यदि किसी व्यक्ति ने वसीयतदाता की ओर से घोर अन्याय या पक्षपात देखा हो और न्याय को वसीयत में सुधारने के लिए कार्रवाई की हो, तो उसे कोई पाप नहीं लगता। भगवान क्षमाशील और अत्यंत दयालु हैं।
[2:181] अगर कोई किसी वसीयत को बदल देता है जिसे उसने सुना था, तो उस बदलाव की दोषी उसके जिम्मेदार होते हैं। भगवान सुनने वाला, जानने वाला है।
[2:183] जो ईमान लाए हो, रोज़ा तुम पर वाजिब है, जैसा कि पहले लोगों पर वाजिब था, ताकि तुम निजात पा सको।