क़ुरआन 48:6 — विजय (अल-फत्ह)
وَيُعَذِّبَ المُنٰفِقينَ وَالمُنٰفِقٰتِ وَالمُشرِكينَ وَالمُشرِكٰتِ الظّانّينَ بِاللَّهِ ظَنَّ السَّوءِ ۚ عَلَيهِم دائِرَةُ السَّوءِ ۖ وَغَضِبَ اللَّهُ عَلَيهِم وَلَعَنَهُم وَأَعَدَّ لَهُم جَهَنَّمَ ۖ وَساءَت مَصيرًا
और वह नाकाम मुनाफिक पुरुष और महिलाएं तथा मूर्तिपूजक पुरुष और महिलाओं का प्रतिदंद लेगा, क्योंकि उन्होंने भगवान के विषय में बुरे विचार रखे हैं। उनका बुरा कर्म उन्हें प्रतिफलित होगा। क्योंकि भगवान उनसे नाराज़ है, उन्हें निन्दा करता है, और उनके लिए गहन्नाम की तैयारी की है। कितना दुखद भाग्य है!
[48:5] वह निश्चित रूप से विश्वासी पुरुष और स्त्रियों को बहती हुई नदियों वाले बागों में प्रवेश दिलाएगा, जहाँ वे हमेशा के लिए ठहरेंगे। उसने उनके पापों को क्षमा कर दिया। यह भगवान की दृष्टि में एक महान विजय है।
[48:7] सभी शक्तियाँ आकाश और पृथ्वी में परमेश्वर की हैं। परमेश्वर शक्तिशाली और सर्वज्ञ है।