क़ुरआन 48:5 — विजय (अल-फत्ह)
لِيُدخِلَ المُؤمِنينَ وَالمُؤمِنٰتِ جَنّٰتٍ تَجرى مِن تَحتِهَا الأَنهٰرُ خٰلِدينَ فيها وَيُكَفِّرَ عَنهُم سَيِّـٔاتِهِم ۚ وَكانَ ذٰلِكَ عِندَ اللَّهِ فَوزًا عَظيمًا
वह निश्चित रूप से विश्वासी पुरुष और स्त्रियों को बहती हुई नदियों वाले बागों में प्रवेश दिलाएगा, जहाँ वे हमेशा के लिए ठहरेंगे। उसने उनके पापों को क्षमा कर दिया। यह भगवान की दृष्टि में एक महान विजय है।
[48:4] वह वही है जो विश्वासी लोगों के हृदय में संतोष डालता है ताकि उनके विश्वास को और बढ़ा सके। सभी आकाश और पृथ्वी की शक्तियाँ भगवान के ही हैं। भगवान सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान हैं।
[48:6] और वह नाकाम मुनाफिक पुरुष और महिलाएं तथा मूर्तिपूजक पुरुष और महिलाओं का प्रतिदंद लेगा, क्योंकि उन्होंने भगवान के विषय में बुरे विचार रखे हैं। उनका बुरा कर्म उन्हें प्रतिफलित होगा। क्योंकि भगवान उनसे नाराज़ है, उन्हें निन्दा करता है, और उनके लिए गहन्नाम की तैयारी की है। कितना दुखद भाग्य है!