क़ुरआन 9:109 — अंतिम निर्णय (बराह)
أَفَمَن أَسَّسَ بُنيٰنَهُ عَلىٰ تَقوىٰ مِنَ اللَّهِ وَرِضوٰنٍ خَيرٌ أَم مَن أَسَّسَ بُنيٰنَهُ عَلىٰ شَفا جُرُفٍ هارٍ فَانهارَ بِهِ فى نارِ جَهَنَّمَ ۗ وَاللَّهُ لا يَهدِى القَومَ الظّٰلِمينَ
क्या वह व्यक्ति जो अपने इमारत की नींव ईश्वर की पूजा करके और उसकी स्वीकृति प्राप्त करने के आधार पर रखता है, बेहतर है, या वह व्यक्ति जो एक टूटने वाले चट्टान के किनारे अपनी इमारत की नींव रखता है, जो की उसके साथ नर्क की आग में गिर जाती है? ईश्वर दुराचारी लोगों को मार्गदर्शन नहीं करते।
[9:108] तुम्हें कभी ऐसे मस्जिद में नमाज नहीं पढ़नी चाहिए। जो मस्जिद पहले दिन से ही नेकी की बुनियाद पर खड़ी है, उसमें तुम्हारी नमाज पढ़ने के लिए अधिक योग्य है। इसमें वे लोग हैं जो शुद्ध होने को पसंद करते हैं। भगवान उन्हें पसंद करता है जो अपने आप को शुद्ध करते हैं।
[9:110] ऐसा एक इमारत जो उन्होंने स्थापित की है, वह उनके दिलों में संदेह का स्रोत बना रहता है, जब तक उनके दिल शांत नहीं हो जाते। भगवान सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान है।