क़ुरआन 9:61 — अंतिम निर्णय (बराह)
وَمِنهُمُ الَّذينَ يُؤذونَ النَّبِىَّ وَيَقولونَ هُوَ أُذُنٌ ۚ قُل أُذُنُ خَيرٍ لَكُم يُؤمِنُ بِاللَّهِ وَيُؤمِنُ لِلمُؤمِنينَ وَرَحمَةٌ لِلَّذينَ ءامَنوا مِنكُم ۚ وَالَّذينَ يُؤذونَ رَسولَ اللَّهِ لَهُم عَذابٌ أَليمٌ
कुछ लोग उन्होंने नबी को ठेस पहुंचाई है कहकर, "वह सिर्फ कान है!" कहो, "तुम्हारे लिए अच्छा है कि वह तुम्हें सुने। वह ईश्वर में विश्वास रखता है, और विश्वासीयों पर भरोसा करता है। वह उनके लिए दया है जो तुममें विश्वास रखते हैं।" जो लोग ईश्वर के पैगंबर को ठेस पहुंचाते हैं, उन्होंने एक दर्दनाक प्रतिशोध को उठाया है।
[9:60] चैरिटी गरीबों, जरूरतमंदों, उन कर्मचारियों को जाएंगी जो इन्हें इकट्ठा करते हैं, नए मसीही, गुलामों को मुक्त करने के लिए, जिन्हें अचानक खर्चों से बोझ उठाना पड़ता है, ईश्वर के कारण, और यात्रा करने वाले पर जाएंगी। ऐसा ही ईश्वर का आदेश है। ईश्वर सर्वज्ञ और सबसे बुद्धिमान हैं।
[9:62] वे तुम्हें भगवान के नाम पर कसम खाते हैं, ताकि तुम्हें खुश करें, जबकि अगर वे सचमुच विश्वासी हैं तो भगवान और उसके पैग़म्बर को खुश करने के लायक हैं।