क़ुरआन 16:112 — मधुमक्खी (अल-नह्ल)
وَضَرَبَ اللَّهُ مَثَلًا قَريَةً كانَت ءامِنَةً مُطمَئِنَّةً يَأتيها رِزقُها رَغَدًا مِن كُلِّ مَكانٍ فَكَفَرَت بِأَنعُمِ اللَّهِ فَأَذٰقَهَا اللَّهُ لِباسَ الجوعِ وَالخَوفِ بِما كانوا يَصنَعونَ
भगवान एक समुदाय का उदाहरण देते हैं जो पहले सुरक्षित और समृद्ध था, जिसे हर जगह से आवश्यकताएँ पहुंचती थीं। लेकिन फिर यह भूल गया कि भगवान की वरदानों की कद्र करनी चाहिए। इस परिणामस्वरूप, भगवान ने उन्हें भूखमरी और असुरक्षा की कठिनाइयों का स्वाद चखने को मजबूर किया। ऐसा है उनके किए गए कार्यों का प्रतिशोध।
[16:111] वह दिन आएगा जब हर आत्मा अपने खुद का प्रतिवादी बनेगी, और हर आत्मा को उसके किए गए हर कार्य का पूरा परिणाम मिलेगा, बिना किसी अन्याय के।
[16:113] उनके पास उनके बीच से एक संदेशक गया था, परन्तु उन्होंने उसे अस्वीकार कर दिया। इस पर उन पर उनके पाप के कारण प्रतिशोध पड़ा।