क़ुरआन 4:19 — महिलाएँ (अल-निसा)
يٰأَيُّهَا الَّذينَ ءامَنوا لا يَحِلُّ لَكُم أَن تَرِثُوا النِّساءَ كَرهًا ۖ وَلا تَعضُلوهُنَّ لِتَذهَبوا بِبَعضِ ما ءاتَيتُموهُنَّ إِلّا أَن يَأتينَ بِفٰحِشَةٍ مُبَيِّنَةٍ ۚ وَعاشِروهُنَّ بِالمَعروفِ ۚ فَإِن كَرِهتُموهُنَّ فَعَسىٰ أَن تَكرَهوا شَيـًٔا وَيَجعَلَ اللَّهُ فيهِ خَيرًا كَثيرًا
जो ईमान लाए हो, उनके लिए यह जायज़ नहीं है कि वे औरतों की छोड़ी हुई संपत्ति को उनकी इच्छा के विपरीत विरासत में लें। तुम्हें उन्हें किसी चीज़ को छोड़ने के लिए मजबूर न करना चाहिए जिसे तुमने उन्हें दिया हो, जब तक वे साबित जुझारू बदचलानी न करें। तुम्हें उनके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। अगर तुम्हें उनसे नापसंद है, तो शायद तुम्हें उसमें कुछ अच्छाई हो, जिसे अल्लाह ने बहुत सारी रखी हो।
[4:18] जिन लोगों ने पाप किए हों और मौत आने पर कहें, "अब मैं पछताता हूँ," उनकी पछतानी स्वीकार्य नहीं है। और जो कफ़ीर मौत के साथ जाते हैं, उनकी पछतानी भी स्वीकार्य नहीं है। इनके लिए हमने एक दर्दनाक सज़ा तैयार की है।
[4:20] यदि आप अपनी वर्तमान पत्नी की जगह किसी और स्त्री से विवाह करना चाहते हैं, और आपने उनमें से किसी को बहुत कुछ दिया हो, तो आपको उसको वापस लेने का कोई अधिकार नहीं है। क्या आप इसे धोखाधड़ी, द्वेषपूर्ण रूप से, और पापपूर्ण तरीके से लेना चाहेंगे?