क़ुरआन 6:30 — पशुपालन (अल-अनआम)
وَلَو تَرىٰ إِذ وُقِفوا عَلىٰ رَبِّهِم ۚ قالَ أَلَيسَ هٰذا بِالحَقِّ ۚ قالوا بَلىٰ وَرَبِّنا ۚ قالَ فَذوقُوا العَذابَ بِما كُنتُم تَكفُرونَ
अगर आप उन्हें उस समय देख सकते जब वे अपने प्रभु के सामने खड़े होते हैं! वह कहेंगे, "क्या यह सच नहीं है?" वे कहेंगे, "हां, हमारे प्रभु।" वह कहेंगे, "तुमने अपने नास्तिकता से दंड उठाया है।"
[6:29] वे (अज्ञात रूप से) कहते हैं, "हम सिर्फ इस जीवन में जीते हैं; हम पुनर्जीवित नहीं होंगे।"
[6:31] हारनेवाले वास्तव में वे होते हैं जो भगवान से मिलने में नास्तिक होते हैं, जब तक कि घड़ी अचानक उनके पास न आ जाए, फिर कहें, "हम अपनी जिंदगी को इस दुनिया में बर्बाद करने पर गहरा पछताएंगे।" वे अपने पीठ पर अपने पापों का भार उठाएंगे; कितना दुखद भार है!